Relevence of Ayurveda in today’s life
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Botanical Name: Aloe vera Tourn
English Name: Aloes
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-शहद को मसूड़ों पर मलने से पायरिया नहीं होता।
-छोटे बच्चों को दूध पिलाने से पहले शहद चटा दें। फिर दूध पिलाएं ये रोग निरोधक क्षमता बढ़ाता है।
– बेसन, मलाई में शहद मिलाकर त्वचा पर लगाएं। थोड़ी देर बाद धो लें, चेहरा चमक उठेगा ।
– प्रतिदिन 25 ग्राम शहद दूध के साथ जरूर लें । इससे शरीर को ताकत मिलती है।
– त्वचा सम्बन्धी रोग हो या कहीं जल-कट गया हो तो शहद लगाएं। जादू सा असर दिखाई देगा।
– रात को सोने से पहले दूध के साथ शहद लेने पर बहुत अच्छी नींद आती है।
– दूध में शक्कर की जगह शहद लेने से गैस नहीं बनती और पेट के कीड़े भी निकल जाते हैं।
– जुकाम होने पर शहद की भाप लें व उसी पानी से कुल्ला करें।
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1. भोजन के एक घंटा पहले पंचसकार चूर्ण को एक चम्मच गर्म पानी के साथ लेने से भूख खुलकर लगती है।
2. रात में सोते समय आँवला 3 भाग, हरड़ 2 भाग तथा बहेड़ा 1 भाग-को बारीक चूर्ण करके एक चम्मच गुनगुने पानी के लेने से सुबह दस्त साफ आता है एवं भूख खुलकर लगती है।
3. एक समय हल्का भोजन करें।
4. खाना खाने के बाद अजवाइन का चूर्ण थोड़े से गुड़ के साथ खाकर गुनगुना पानी पीने से खाया हुआ पचेगा, भूख लगेगी और खाने में रुचि पैदा होती है।
5. भोजन के बाद एक चम्मच हिंग्वष्टक चूर्ण खाने से पाचन-क्रिया ठीक होती है।
6. हरे धनिए में हरी मिर्च, टमाटर, अदरक, हरा पुदीना, जीरा, हींग, नमक, काला नमक डालकर बनाई गई चटनी खाने से भी तेज भूख लगती है।
7. भोजन करने के बाद थोड़ा सा अनारदाना या उसके बीज के चूर्ण में काला नमक एवं थोड़ी सी मिश्री पीसकर मिलाने के बाद पानी के साथ एक चम्मच खाने से भूख बढ़ती है।
8. एक गिलास छाछ में काला नमक, सादा नमक, पिसा जीरा मिलाकर पीने से पाचन-क्रिया तेज होकर अरूचि दूर होती है।
9. भोजन के बाद 5-10 मिनिट घूमना पाचन में सहायक होता है।
10. भोजन करने के बाद वज्रासन में कुछ देर बैठना भी बेहद लाभदायक होता है।
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– यदि आप नींद न आने की समस्या से परेशान हैं तो बस शतावरी की जड़ को खीर के रूप में पका लें उसमें थोड़ा गाय का घी डालें और ग्रहण करें। इससे आप तनाव से मुक्त होकर अच्छी नींद ले पाएंगे।
-शतावरी की ताजी जड़ को मोटा-मोटा कुट लें, इसका स्वरस निकालें और इसमें बराबर मात्रा में तिल का तेल मिलाकर पका लें। इस तेल को माइग्रेन जैसे सिरदर्द में लगाएं और लाभ देखें।
-यदि रोगी खांसते-खांसते परेशान हो तो शतावरी चूर्ण – 1.5 ग्राम, वसा के पत्ते का स्वरस 2.5 मिली, मिश्री के साथ लें और लाभ देखें।
-प्रसूता स्त्रियों में दूध न आने की समस्या होने पर शतावरी का चूर्ण -पांच ग्राम गाय के दूध के साथ देने से लाभ मिलता है।
-पुरुष यौन शिथिलता से परेशान हो तो शतावरी पाक या केवल इसके चूर्ण को दूध के साथ लेने से लाभ मिलता है।
-यदि रोगी को मूत्र से सम्बंधित विकृति हो तो शतावरी को गोखरू के साथ लेने से लाभ मिलता है।
– शतावरी मूल का चूर्ण -2.5 ग्राम, मिश्री -2.5 ग्राम को एक साथ मिलाकर पांच ग्राम क़ी मात्रा में रोगी को सुबह शाम गाय के दूध के साथ देने से प्रमेह, प्री -मैच्योर इजेकुलेशन (स्वप्न-दोष ) में लाभ मिलता है।
-शतावरी के जड़ के चूर्ण को पांच से दस ग्राम की मात्रा में दूध के साथ नियमित रूप से सेवन करने से धातु वृद्धि होती है।
-वातज ज्वर में शतावरी के रस एवं गिलोय के रस का सेवन करने से ज्वर (बुखार) से मुक्ति मिलती है।
-शतावरी के रस को शहद के साथ लेने से जलन, दर्द एवं अन्य पित्त से सम्बंधित बीमारियों में लाभ मिलता है।
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छह से बारह फुट उंचा इसका पौधा,झाड़ीनुमा सूक्ष्म रोमों से ढका रहता है। पत्तियों की पहचान किनारों से की जा सकती है। इसके फल छोटे,गोल एवं सफेद होते हैं।
यह कफ वातशामक औषधि के रूप में जानी जाती है ,जिसे श्रेष्ठ वेदनास्थापन अर्थात दर्द को कम करने वाला माना गया है। यह घाव को विसंक्रमित करने और भरनेवाले गुणों से युक्त होता है।आइए अब इसके औषधीय प्रयोग से हम आपको रु-ब-रु कराते हैं। इसके पत्तों को कूटकर टिकिया बनाकर यदि पीड़ा वाले जगह पर बाँध दिया जाय तो यह दर्द को तुरंत कम कर देता है। इसकी पत्तियों का काढ़ा बनाकर कुल्ला करने मात्र से गले का दर्द दूर हो जाता है। यदि किसी को मुंह में छाले हो गए हों या गले में किसी प्रकार की सूजन हो, तो हल्के से गुनगुने पानी में निर्गुन्डी तेल एवं थोड़ा सा नमक मिलाकर गरारे कराने से लाभ मिलता है। यदि होंठ कटे हों तो भी केवल इसके तेल को लगाने से लाभ मिल जाता है। किसी भी प्रकार का कान दर्द हो तो निर्गुन्डी की पत्तियों के तेल को शहद के साथ मिलाकर एक से दो बूँद की मात्रा में कानों में डाल दें ,निश्चित लाभ मिलेगा। धीमी आंच पर निर्गुन्डी के पत्तों को लगभग आधा लीटर पानी में पकाकर चौथाई शेष रहने पर 10-20 मिली की मात्रा में दिन में दो से तीन बार खाली पेट देना सायटिका जैसी स्थिति में भी प्रभावी होता है।
निर्गुन्डी के चूर्ण को शुंठी के चूर्ण के साथ बराबर मात्रा में मिलाकर लेना सेक्सुअल एक्टिविटी को बढ़ाने में मददगार होता है।मांसपेशियों की सूजन में निर्गुन्डी की छाल का चूर्ण पांच ग्राम मात्रा में देना लाभकारी होता है। सर्दी, जुकाम और बुखार में भी इसके तेल की मालिश रोगी को आराम देती है। शरीर के किसी भी हिस्से में होनेवाली गांठ जो प्राय: बंद हो तो केवल इसके पत्तों को बांधने से बंद गाँठ खुल जाती है और अन्दर स्थित मवाद बाहर आ जाता है। निर्गुन्डी को यदि शिलाजीत के साथ प्रयोग किया जाए तो इसका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। किसी भी प्रकार का सरदर्द हो या जोड़ों की हो सूजन ,इसके पत्तों को गरम कर बांध कर उपनाह देने से सूजन और दर्द में कमी आती है। संधिवात, आमवात, संधिशोथ या अन्य संधियों से सम्बंधित विकृतियों में निर्गुन्डी के पत्तों से बनाए गए तेल की मालिश से भी लाभ मिलता है।
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छह से बारह फुट उंचा इसका पौधा,झाड़ीनुमा सूक्ष्म रोमों से ढका रहता है। पत्तियों की पहचान किनारों से की जा सकती है। इसके फल छोटे,गोल एवं सफेद होते हैं।
यह कफ वातशामक औषधि के रूप में जानी जाती है ,जिसे श्रेष्ठ वेदनास्थापन अर्थात दर्द को कम करने वाला माना गया है। यह घाव को विसंक्रमित करने और भरनेवाले गुणों से युक्त होता है।आइए अब इसके औषधीय प्रयोग से हम आपको रु-ब-रु कराते हैं। इसके पत्तों को कूटकर टिकिया बनाकर यदि पीड़ा वाले जगह पर बाँध दिया जाय तो यह दर्द को तुरंत कम कर देता है। इसकी पत्तियों का काढ़ा बनाकर कुल्ला करने मात्र से गले का दर्द दूर हो जाता है। यदि किसी को मुंह में छाले हो गए हों या गले में किसी प्रकार की सूजन हो, तो हल्के से गुनगुने पानी में निर्गुन्डी तेल एवं थोड़ा सा नमक मिलाकर गरारे कराने से लाभ मिलता है। यदि होंठ कटे हों तो भी केवल इसके तेल को लगाने से लाभ मिल जाता है। किसी भी प्रकार का कान दर्द हो तो निर्गुन्डी की पत्तियों के तेल को शहद के साथ मिलाकर एक से दो बूँद की मात्रा में कानों में डाल दें ,निश्चित लाभ मिलेगा। धीमी आंच पर निर्गुन्डी के पत्तों को लगभग आधा लीटर पानी में पकाकर चौथाई शेष रहने पर 10-20 मिली की मात्रा में दिन में दो से तीन बार खाली पेट देना सायटिका जैसी स्थिति में भी प्रभावी होता है।
निर्गुन्डी के चूर्ण को शुंठी के चूर्ण के साथ बराबर मात्रा में मिलाकर लेना सेक्सुअल एक्टिविटी को बढ़ाने में मददगार होता है।मांसपेशियों की सूजन में निर्गुन्डी की छाल का चूर्ण पांच ग्राम मात्रा में देना लाभकारी होता है। सर्दी, जुकाम और बुखार में भी इसके तेल की मालिश रोगी को आराम देती है। शरीर के किसी भी हिस्से में होनेवाली गांठ जो प्राय: बंद हो तो केवल इसके पत्तों को बांधने से बंद गाँठ खुल जाती है और अन्दर स्थित मवाद बाहर आ जाता है। निर्गुन्डी को यदि शिलाजीत के साथ प्रयोग किया जाए तो इसका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। किसी भी प्रकार का सरदर्द हो या जोड़ों की हो सूजन ,इसके पत्तों को गरम कर बांध कर उपनाह देने से सूजन और दर्द में कमी आती है। संधिवात, आमवात, संधिशोथ या अन्य संधियों से सम्बंधित विकृतियों में निर्गुन्डी के पत्तों से बनाए गए तेल की मालिश से भी लाभ मिलता है।
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– हरे धनिए का लेप लगाने से बाल आने लगते हैं।
– केले के गूदे को नींबू के रस में पीस लें और लगाएं, इससे लाभ होता है।
– अनार के पत्ते पानी में पीसकर सिर पर लेप करने से गंजापन दूर होता है।
– नमक का अधिक सेवन करने से गंजापन आ जाता है। पिसा हुआ नमक, काली मिर्च एक-एक चम्मच और नारियल का तेल पांच चम्मच मिलाकर लगाने से बाल आने लगते हैं।
– अगर किसी जगह से बाल उड़ जाए तो गंजेपन वाली जगह पर नींबू रगड़ते रहने से बाल दुबारा आने लगते हैं।
– प्याज का रस रगड़ते रहने से बाल आने लगते हैं।
– बालों में नीम का तेल लगाने से भी राहत मिलती है।
– लहसुन का खाने में अधिक प्रयोग करें।
– उड़द की दाल उबाल कर पीस लें और सोते समय सिर पर लेप लगाएं ।
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